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फाइनेंस का महत्त्व?

फाइनेंस का महत्त्व?

माइक्रो फाइनेंस दे सकता है और भी तेज आर्थिक तरक्की

जहां दुनिया ने पिछले 15 वर्षों में संयुक्त राष्ट्र सहस्राब्दी विकास लक्ष्य हासिल करने की दिशा में कुछ प्रगति की है, घोर गरीबी अब भी ज्वलंत समस्या बनी हूई है, जबकि इन लक्ष्यों में भूख और गरीबी मिटाने को सबसे ऊपर रखा गया है। गरीबी को 2015-2030 के टिकाऊ विकास के लक्ष्यों में भी प्राथमिकता दी गई है। हाल ही में गरीबी और इसे मिटाने के तरीकों पर एक अर्थशास्त्री द्वारा किए अध्ययन में निष्कर्ष निकला कि विकासशील देशों में छोटे स्तर पर दिए जाने वाले ऋण में थोड़े इजाफे से 1 करोड़ से ज्यादा लोगों को घोर गरीबी से बाहर निकाल आर्थिक विकास को रफ्तार दी जा सकती है।


खासतौर पर भारत जैसे देश में जहां 70 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है और 60 फीसदी खेती पर निर्भर है (विश्व बैंक के अनुसार) माइक्रो फाइनेंस गरीबों कम आय वाले वर्गों को वित्तीय सेवाएं देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। माइक्रो फाइनेंस में गरीबों कम आय वर्गों को डिपॉजिट, लोन, भुगतान सेवाएं, पैसे को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजना, बीमा, बचत, छोटे लोन आदि की सेवाएं आती हैं। भारत जैसे देश में माइक्रो फाइनेंस के महत्व को अनदेखा नहीं किया जा सकता, जहां बड़ी आबादी गरीबी में जी रही है और बड़ी संख्या में लोगों की पहुंच औपचारिक बैंकिंग सुविधाओं तक नहीं है। छोटे ऋण तक पहुंच होने से गरीब लोगों को कोई उद्यम शुरू करके अपने आय बढ़ाकर जीवन की गुणवत्ता बढ़ाने का मौका मिलता है।
लोन देने वाली कई संस्थाएं उन्हें उनके जैसे लोगों की मदद, नेटवर्किंग के मौके और यहां तक कि हेल्थ केयर जैसी सुविधाएं देते हैं, जिससे ग्राहक के सफल उद्यमी बनने की अड़चनें काफी हद तक दूर जाएं। उनके ऐसा करने का मतलब है कि माइक्रो फाइनेंस में गरीबी घटाने की प्रबल क्षमता है। आर्थिक विकास के स्तर का सीधा संबंध वित्तीय साक्षरता के स्तर से होता है, जिसका देश में अभाव है। ये माइक्रो फाइनेंस संस्थान सिर्फ गरीब वर्ग को औपचारिक बैंक सिस्टम में लाकर बल्कि आम लोगों में वित्तीय साक्षरता के बीज बोकर बदलाव के वाहक बन सकते हैं।

पर्सनल फाइनेंस क्या है? - मतलब, महत्व और वह सबकुछ जो आपको पता होना चाहिए

30 साल के सुभाष से मिलिए। उसके पास एक स्थिर नौकरी है, वह हर महीने एक अच्छी रकम कमाता है और वह जानता है कि उस पैसे का प्रबंधन कैसे किया जाए। उनके पिता हाल ही में 40 से अधिक वर्षों बाद उसी कंपनी से रिटायर हुए हैं। अब 60 वर्ष से अधिक की आयु में सुभाष के पिता केवल एक चीज़ की इच्छा रखते हैं। वे हमेशा से एक कार लेना चाहते थे। लेकिन इस बड़ी खरीद के लिए वे पर्याप्त बचत नहीं कर पाए।

उनका प्रति महीने आय लगभग ₹50,000 थी और मासिक घरेलू खर्च ₹40,000 तक था। सुभाष के पिता अपने परिवार की ज़रूरतों और आवश्यकताओं को पूरा करने में कामयाब रहे। लेकिन वे कभी अपनी उस महंगी इच्छा को पूरा नहीं कर पाए। यह जानकर सुभाष ने हाल ही में अपने पिता को सरप्राइज़ करने का फैसला किया। उन्होंने अपने पिता को रियटायरमेंट तोहफे में वही कार दी जिसे उनके पिता हमेशा से लेना चाहते थे।

दोनों समान रूप से हैरान थे, सुभाष के पिता का एक ही सवाल था। शायद आपके पास भी वहीं सवाल होगा।

जब सुभाष के पिता ने 40 साल के करियर में इसे पाने का जोखिम नहीं उठाया, तो सुभाष ने 30 साल की उम्र में ऐसी खरीदारी करने का इंतज़ाम कैसे किया?

जवाब साफ है। सुभाष के पिता ने केवल अपने पैसे बचाए, इस बीच सुभाष ने इनका निवेश किया। सिर्फ बचत करने से पूंजी को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है। लेकिन निवेश से इसे बढ़ाने में मदद मिलती है। और यहीं पर्सनल फाइनेंस काम आता है। यह केवल कमाई, खर्च और बचत से कहीं बढ़कर है। यह आपके व्यक्तिगत जीवन के लक्ष्यों पर आधारित फाइनेंशियल प्लान बनाने और उसका पालन करने में मदद करता है।

इस मॉड्यूल में हम पर्सनल फाइनेंस से संबंधित सभी प्रमुख बातों के बारे में जानेंगे। और यह जानेंगे कि कैसे फाइनेंशियल प्लान आपके पैसे को बढ़ने में मदद कर सकता है। आइए कुछ महत्वपूर्ण सवालों के जवाब दें जैसे कि पर्सनल फाइनेंस क्या है और पर्सनल फाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है।

पर्सनल फाइनेंस क्या है?

सरल शब्दों में, पर्सनल फाइनेंस आपके वित्त का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने की कला है। इसमें बजट तैयार करना, फाइनेंशियल प्लान बनाना, बचत करना, सोच-समझकर खर्च करना और सबसे अहम, स्मार्ट तरीके से निवेश करना शामिल है। पहली नज़र में तो यह हमें बेहद आसान लगता है, है ना? लेकिन जब आप गहराई में जाते हैं तो आप देखेंगे कि पर्सनल फाइनेंस ऐसी चीज नहीं है जिसे आप रात भर में सीख लेंगे। अच्छी पर्सनल फाइनेंस की आदतें डालने के लिए प्रतिबद्धता, समर्पण और मेहनत की ज़रूरत पड़ती है।

व्यक्तिगत स्तर पर पर्सनल फाइनेंस यह सुनिश्चित करता है कि आपका पैसा सबसे अच्छे तरीके से खर्च और निवेश किया जाए। लेकिन उस चरण तक पहुंचने के लिए आपको पर्सनल फाइनेंस में शामिल कई तत्वों के बारे में पता होना चाहिए। यह केवल खर्च और बचत से कहीं बढ़कर हैं। हमारे पहले उदाहरण से सुभाष के पिता का मामला लेते हैं। वह निश्चित ही अपने परिवार की ज़रूरतों के लिए पर्याप्त बचत करने में कामयाब रहे। लेकिन क्या इतना ही काफी है?

जाहिर है, नहीं। जैसा कि सुभाष के उदाहरण से पता लगता है कि पर्सनल फाइनेंस आपके मासिक खर्चों के पूरा होने के बाद की राशि की बचत करने से कहीं बढ़कर है। इन अतिरिक्त पहलुओं को ही हम इस मॉड्यूल में बड़े पैमाने पर देखेंगे। इनमें आपके लक्ष्यों का आकलन, निवेश जोखिम सहने की आपकी क्षमता को मापना और भविष्य के लिए आपकी अपेक्षाएं जानना शामिल हैं।

इससे पहले कि हम उस चरण पर पहुंचें, एक महत्वपूर्ण सवाल पर ध्यान देते हैं कि पर्सनल फाइनेंस महत्वपूर्ण क्यों है? यह आपके जैसे व्यक्तियों के लिए क्यों ज़रूरी है?

पर्सनल फाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है?

पर्सनल फाइनेंस की आवश्यकता बहुमुखी है। हर व्यक्ति के आधार पर पर्सनल फाइनेंस कई प्रकार के फायदे देता है। कुछ लोगों के लिए, यह धन प्रबंधन को आसान बनाता है, अन्य लोगों के लिए यह उनके निवेश और फाइनेंशियल प्लानिंग को बेहतर बनाने में मदद करता है। आइए, पर्सनल फाइनेंस इतना महत्वपूर्ण क्यों है इसके पीछे के व्यापक कारणों पर एक नज़र डालते हैं।

यह आपके फाइनेंस को बेहतर तरीके से समझने में मदद करता है

जब आप अपने फाइनेंस को बेहतर ढंग से समझने लगते हैं तो आप अपने धन पर काबू पाने की शुरूआत करते हैं। आपको कुछ बुनियादी सवालों के जवाब ढूंढने की ज़रूरत होती है:

  • आपका मासिक बजट क्या है?
  • आपका कितना पैसा आप लग्ज़री उत्पादों और सेवाओं पर खर्च करते हैं?
  • और अपनी ज़रूरत की चीजों पर कितना खर्च करते हैं?
  • आपकी भविष्य की आवश्यकताएं क्या हैं?

पर्सनल फाइनेंस के लिए आपको कुछ ऐसी चीजों के बारे में जानना होता है। और ऐसा करने से आप बेहतर तरीके से समझ पाएंगे कि आप कितना कमाते हैं, कितना खर्च करते हैं और कितना बचत करते हैं। और इससे आप अपने वित्त को बेहतर तरीके से समझने लगते हैं। फाइनेंस का महत्त्व? यह भविष्य में आपके द्वारा की जाने वाली फाइनेंशियल प्लानिंग की नींव रखता है।

यह आपको अपने निवेश की योजना बनाने में सक्षम बनाता है

जब आप अपने वित्त का ध्यान रखते हैं, तो निवेश की योजना बनाना आसान हो जाता है। हमारे पिछले उदाहरण में से सुभाष इसके लिए एक बेस्ट रोल मॉडल है। जब से उन्होंने 24 की उम्र में अपनी पहली तनख्वाह कमाई थी, तभी से वो लगातार अपने पैसे निवेश कर रहे हैं। यह केवल इसलिए संभव था क्योंकि उसने कुछ फाइनेंशियल प्लानिंग की थी जिससे उसके निवेश सुव्यवस्थित हो गए। छोटी और लंबी अवधि के स्पष्ट लक्ष्यों के साथ आप पर्सनल फाइनेंस के ज़रिए स्मार्ट तरीके से निवेश कर सकते हैं।

यह आपको अत्यधिक ऋण लेने से रोकता है

EMI का विकल्प काफी लुभावना हो सकता है, क्योंकि यह ‘अभी खरीदें और बाद में भुगतान करें’ वाली सोच को बढ़ावा देता है। अक्सर इन ऋणों को आसानी से मैनेज किया जा सकता है, खासकर जब आपके पास एक अच्छी निरंतर, स्थिर आय हो। हालांकि कुछ लोग भारी ऋण ले लेते हैं जिसका भुगतान करना असंभव हो जाता है। और कर्ज का बोझ सहन करना एक बहुत बड़ा भार है।

लेकिन जब आप अपने फाइनेंस को संभालते हैं, तो आप ऐसे कर्ज़ों से दूर हो जाते हैं, जिनको आप शायद ना चुका पाएं। यह फाइनेंशियल प्लानिंग करने और अपने पर्सनल फाइनेंस पर नज़र रखने के के सबसे बड़े फायदों में से एक है।

यह आपके धन और संपत्ति को बढ़ाने में मदद करता है

पर्सनल फाइनेंस आपको अपनी आवश्यकताओं के लिए बचत करने से एक कदम आगे ले जाता है। यह आपको सही निवेश विकल्प चुनने में मदद कर आपके पैसे को कई गुना बढ़ाने में मदद करता है। दूसरे शब्दों में पर्सनल फाइनेंस आवश्यक है क्योंकि यह आपको संपत्ति बनाने में मदद करता है, ताकि आपका भविष्य आर्थिक रूप से सुरक्षित रहे। सही फाइनेंशियल प्लानिंग के साथ आप आराम से रिटायर हो सकते हैं और भविष्य में अपने सपनों और लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं।

निष्कर्ष

तो अब आप इस सवाल का जवाब जानते हैं कि पर्सनल फाइनेंस क्यों महत्वपूर्ण है? इस बढ़िया व्यक्तिगत आदत को शुरू करने के लिए उत्सुक हैं? तो आने वाले अध्याय आपके लिए बेहद ज़रूरी हैं, जहां हम पर्सनल फाइनेंस के विभिन्न पहलुओं को समझने के लिए कर, बीमा, निवेश और अन्य विषयों पर नज़र डालेंगे। तो पढ़ते रहिए।

फाइनेंस का महत्त्व?

अर्थव्यवस्था में सरकार की भूमिका का अध्ययन लोक वित्त (Public finance) कहलाता है। यह अर्थशास्त्र की वह शाखा है जो सरकार के आय (revenue) तथा व्यय का आकलन करती है। अर्थात सार्वजनिक वित्त सरकार के आय व व्यय का विस्तृत अध्ययन है। इसके द्वारा राज्य द्वारा अर्जित आय तथा सार्वजनिक अधिकारियों द्वारा किए गए व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत किया जाता है। सरकार के आय व व्यय को सीमान्त समन्वय के द्वारा नियमित किया जाता है ताकि अधिकतम जनहित प्राप्त किया जा सके।यह वांछित प्रभाव प्राप्त करने और अवांछित प्रभावों से बचने के लिये इनमें आवश्यक घट-बढ करने का सुझाव भी देती है।आधुनिक लोकतांत्रिक समाजो में लोकवित्त अर्थात आय और व्यय से जुड़े प्रावधान लोगों के जीवन स्तर और देश की विकास प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव डालता है।

अपने फ्यूचर के लिए ऐसे करें पैसों का प्रबंधन, कभी नहीं लेना होगा कर्ज

निवेश सलाहकारों की मानें तो किसी भी व्‍यक्ति को सोच-समझ कर आर्थिक लक्ष्‍य तय चाहिए. इन लक्ष्‍यों को सिर्फ अपने पर्सनल फाइनेंस के प्रभावी प्रबंधन से ही प्राप्‍त किया जा सकता है.

पर्सनल फाइनेंस के इन फंडों के साथ करें अपने फ्यूचर की प्‍लानिंग

भविष्‍य के गर्भ में क्‍या छिपा है यह कौन जानता है. इसलिए आर्थिक लक्ष्‍य तय करते हुए चलना प्रत्‍येक व्‍यक्ति के जीवन का एक अभिन्‍न हिस्‍सा होना चाहिए. निवेश सलाहकारों की मानें तो किसी भी व्‍यक्ति को सोच-समझ कर आर्थिक लक्ष्‍य तय चाहिए. इन लक्ष्‍यों को सिर्फ अपने पर्सनल फाइनेंस के प्रभावी प्रबंधन से ही प्राप्‍त किया जा सकता है. अब सवाल उठता है कि पर्सनल फाइनेंस है क्‍या? सामान्‍य शब्‍दों में कहें तो पर्सनल फाइनेंस पैसों के प्रबंधन का विज्ञान है. इसमें किसी व्‍यक्ति या परिवार की सभी गतिविधियां और वित्‍तीय निर्णय शामिल होते हैं. पर्सनल फाइनेंस में किसी वित्‍तीय उत्‍पाद की खरीदारी जैसे होम लोन, जीवन बीमा, क्रेडिट कार्ड्स और कार लोन आदि शामिल होते हैं. बैंकिंग फाइनेंस का मफाइनेंस का महत्त्व? हत्त्व? भी पर्सनल फाइनेंस का ही एक हिस्‍सा है.

पर्सनल फाइनेंस की अहम बातें
पर्सनल फाइनेंस विभिन्‍न पहलुओं जैसे निवेश, लोन, कमाई, बचत, टैक्‍स, कर्ज प्रबंधन, बजट बनाना और खर्च को कवर करता है. आपकी कमाई जितनी अधिक होगी, आपकी जीवनशैली भी उतनी ही बेहतर होगी. किसी भी व्‍यक्ति में बेहतर कमाई करने की क्षमता होनी चाहिए. निवेश से जुड़े प्रोफेशनल्‍स भी लोगों को हमेशा यह सलाह देते हैं कि वे विभिन्‍न माध्‍यमों से अपनी कमाई में इजाफा करें. आप कितना बचाते हैं यह इस बात से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है कि आप कितना कमाते हैं. बेहतर बचत कर आप अपने भविष्‍य को आर्थिक कमी से सुरक्षित कर सकते हैं. पर्सनल फाइनेंस का प्राथमिक पहलू कमाई और खर्च के बीच संतुलन स्‍थापित करना है. बजट बनाकर चलने से आपको यह संतुलन बनाने में मदद मिलेगी.

अब सवाल उठता है कि आपको बजट बनाने की क्‍या जरूरत है? बजट आपको अपने खर्च को तरजीही तौर पर रखने में मदद करता है, आपके दिन-प्रतिदिन के खर्चों का प्रबंधन करता है और निवेश के वैकल्पिक माध्‍यमों की तलाश करता है. आर्थिक लेनदेन का प्रबंधन पर्सनल फाइनेंस का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है. उधार या लोन काफी महत्‍वपूर्ण हैं. क्रेडिट कार्ड पर लोन लेना अच्‍छा निर्णय नहीं है. यह सलाह दी जाती है कि आप वैसे लोन से बचें जो आपके हाइपोथिकेशन की तरफ जाता है.

क्रेडिट रेटिंग के महत्‍व को समझें
अगर आपकी क्रेडिट रेटिंग अच्‍छी है तो आपको अपेक्षाकृत कम ब्‍याज दर पर कर्ज लेने में मदद मिल सकती है. क्रेडिट स्‍कोर यह प्रदर्शित करता है कि किसी व्‍यक्ति की ऋण लेने की पात्रता कितनी अधिक है. किसी भी व्‍यक्ति की रेटिंग तीन अंकों की संख्‍या में की जाती है. यह संख्‍या जितनी बड़ी होगी ऋण लेने की पात्रता भी उतनी ही अधिक होगी. यह संख्‍या जितनी कम होगी ऋण लेने की पात्रता भी उतनी ही कम होगी. ऐसे कई तरीके हैं जिनके जरिए आप अपनी ऋण लेने की पात्रता बढ़ा सकते हैं. ज्‍यादातर लोग इस पहलू पर गौर नहीं करते हैं. अपनी विश्‍वसनीयता बनाए रखने का सबसे बढि़या तरीका यह है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान नियत समय से पहले कर दिया करें. अगर आपकी क्रेडिट रेटिंग खराब है तो संभव है कि बैंक आपके लोन के आवेदन को खारिज कर दे.

बजट बनाकर चलें
प्रत्‍येक व्‍यक्ति को बजट बनाना चाहिए यह सबसे प्रारंभिक चरण है और सबसे अधिक फायदेमंद भी. अब आप पूछेंगे कि बजट क्‍या है? बजट आपके नकद के आने और जाने का प्रबंधन प्रभावी तरीके से करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, 50/30/20 का बजटिंग सिस्‍टम सबसे बेहतर रूपरेखा उपलब्‍ध कराता है. इसका मतलब है कि आपकी कमाई का 50 फीसदी आधारभूत जरूरतों जैसे घर के सामान (किराना, खाने-पीने का), परिवहन, किराया और यूटिलिटी बिल्‍स के लिए जाता है. 30 फीसदी हिस्‍सा जीवनशैली से जुड़ी चीजों जैसे शॉपिंग, बाहर खाना खाने आदि में जाता है और शेष 20 फीसदी आपातकालीन परिस्थितियों और रिटायरमेंट करने के लिए बचाया जाता है.

इमरजेंसी फंड की व्‍यवस्‍था करें
अगर आप अपने परिवार के कमाऊ सदस्‍य हैं तो आपको आपातकालीन परिस्थितियों के लिए प्रावधान करते हुए चलना चाहिए. इसका मतलब हुआ कि आपको अपनी शुद्ध कमाई का 10 से 20 फीसदी हिस्‍सा मेडिकल खर्चों और फाइनेंस का महत्त्व? यूटिलिटी बिल्‍स के लिए बचा कर रखना चाहिए. जो लोग आपातकालीन परिस्थितियों के लिए बचत नहीं करते हैं उन्‍हें भविष्‍य में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यह याद रखें कि यह बचत से बिल्‍कुल भिन्‍न है. सामान्‍य तौर पर ऐसा देखा गया है कि जो लोग विपरीत परिस्थिति के लिए पैसे नहीं बचाते उन्‍हें काफी दिक्‍कतें होती हैं.

कर्ज लेने से बचें
अपनी कमाई से ज्‍यादा खर्च करना कुछ लोगों की प्रवृत्ति होती है. यह गलत आदत है. अपनी कमाई से ज्‍यादा खर्च करना आपको परेशानी में डाल सकता है. जहां तक संभव हो खुद को कर्ज से दूर ही रखें. हम में से हर कोई कर्ज-मुक्‍त नहीं हो सकता लेकिन कर्ज लेने पर अंकुश लगाया जाना चाहिए. कभी-कभार किसी परिसंपत्ति के सृजन के लिए कर्ज लेना लाभकारी भी होती है. उदाहरण के तौर पर होम लोन लेकर घर खरीदना. भविष्‍य में परेशानियों से बचने के लिए जितना संभव हो सके, कर्ज लेने से बचें.

क्रेउिट कार्ड से न करें अंधाधुंध खर्च
क्रेडिट कार्ड क्‍या है? क्रेडिट कार्ड बैंकों द्वारा उपलब्‍ध कराई जाने वाली विस्‍तारी बैंकिंग सुविधा है. प्रत्‍येक क्रेडिट कार्ड की एक क्रेडिट लिमिट होती है जिसे किसी व्‍यक्ति की मासिक कमाई और उसके कर्ज लेने की पात्रता के आधार पर तय किया जाता है. क्रेडिट कार्ड का भुगतान ग्रेस पीरियड के भीतर ही कर देना चाहिए क्‍योंकि बाद में भुगतान करने से आपका बोझ बढ़ेगा ही. यह सुनि‍श्चित करें कि आप क्रेडिट कार्ड की क्रेडिट लिमिट के 30 फीसदी से ज्‍यादा का खर्च नहीं कर रहे हैं. अतिरिक्‍त शुल्‍कों से बचने के लिए तय समय से पहले या निर्धारित समय तक बिल का भुगतान कर दें.

क्रेडिट रेटिंग को न करें अनदेखा
ऋण की पात्रता या क्रेडिट स्‍कोर बनाने और उसके प्रबंधन में क्रेडिट कार्ड की भूमिका महत्‍वपूर्ण होती है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आपके बैंकों द्वारा दाखिल की गई क्रेडिट रिपोर्ट के बाधार पर आपकी रेटिंग करती हैं. एक अच्‍छी क्रेडिट हिस्‍ट्री आपकी क्रेडिट रेटिंग को बेहतर बना सकती है जिससे आपको अपेक्षाकृत कम ब्‍याज दर पर बैंक से लोन लेने में मदद मिलती है. अगर आप यह सोचते हैं कि आपकी क्रेडिट रेटिंग खराब है तो आप इसे सुधार सकते हैं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों जैसे एक्‍सपीरियन, ट्रांसयूनियन और इक्विफैक्‍स से आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की मुफ्त प्रति प्राप्‍त कर सकते हैं.

रिटायरमेंट के लिए कर लें तैयारी
आपको रिटायरमेंट के बाद शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए आपको आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए क्‍योंकि रिटायरमेंट आपकी उम्‍मीदों फाइनेंस का महत्त्व? से कहीं जल्‍दी दस्‍तक दे जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद आपको अपने मौजूदा वेतन के लगभग 80 फीसदी की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए आपको बचत की शुरुआत जल्‍दी करनी चाहिए. आप जितनी जल्‍दी शुरुआत करेंगे उतना ही अधिक लाभ आपको अपने निवेश से होगा. आपको सलाह दी जाती है कि आप भविष्‍य के लिए धन बचाने हेतु ऐसे प्‍लान में निवेश करें जिस पर टैक्‍स बेनिफिट भी मिलता हो.

अपने फ्यूचर के लिए ऐसे करें पैसों का प्रबंधन, कभी नहीं लेना होगा कर्ज

निवेश सलाहकारों की मानें तो किसी भी व्‍यक्ति को सोच-समझ कर आर्थिक लक्ष्‍य तय चाहिए. इन लक्ष्‍यों को सिर्फ अपने पर्सनल फाइनेंस के प्रभावी प्रबंधन से ही प्राप्‍त किया जा सकता है.

पर्सनल फाइनेंस के इन फंडों के साथ करें अपने फ्यूचर की प्‍लानिंग

भविष्‍य के गर्भ में क्‍या छिपा है यह कौन जानता है. इसलिए आर्थिक लक्ष्‍य तय करते हुए चलना प्रत्‍येक व्‍यक्ति के जीवन का एक अभिन्‍न हिस्‍सा होना चाहिए. निवेश सलाहकारों की मानें तो किसी भी व्‍यक्ति को सोच-समझ कर आर्थिक लक्ष्‍य तय चाहिए. इन लक्ष्‍यों को सिर्फ अपने पर्सनल फाइनेंस के प्रभावी प्रबंधन से ही प्राप्‍त किया जा सकता है. अब सवाल उठता है कि पर्सनल फाइनेंस है क्‍या? सामान्‍य शब्‍दों में कहें तो पर्सनल फाइनेंस पैसों के प्रबंधन का विज्ञान है. इसमें किसी व्‍यक्ति या परिवार की सभी गतिविधियां और वित्‍तीय निर्णय शामिल होते हैं. पर्सनल फाइनेंस में किसी वित्‍तीय उत्‍पाद की खरीदारी जैसे होम लोन, जीवन बीमा, क्रेडिट कार्ड्स और कार लोन आदि शामिल होते हैं. बैंकिंग भी पर्सनल फाइनेंस का ही एक हिस्‍सा है.

पर्सनल फाइनेंस की अहम बातें
पर्सनल फाइनेंस विभिन्‍न पहलुओं जैसे निवेश, लोन, कमाई, बचत, टैक्‍स, कर्ज प्रबंधन, बजट बनाना और खर्च को कवर करता है. आपकी कमाई जितनी अधिक होगी, आपकी जीवनशैली भी उतनी ही बेहतर होगी. किसी भी व्‍यक्ति में बेहतर कमाई करने की क्षमता होनी चाहिए. निवेश से जुड़े प्रोफेशनल्‍स भी लोगों को हमेशा यह सलाह देते हैं कि वे विभिन्‍न माध्‍यमों से फाइनेंस का महत्त्व? अपनी कमाई में इजाफा करें. आप कितना बचाते हैं यह इस बात से ज्‍यादा महत्‍वपूर्ण है कि आप कितना कमाते हैं. बेहतर बचत कर आप अपने भविष्‍य को आर्थिक कमी से सुरक्षित कर सकते हैं. पर्सनल फाइनेंस का प्राथमिक पहलू फाइनेंस का महत्त्व? कमाई और खर्च के बीच संतुलन स्‍थापित करना है. बजट बनाकर चलने से आपको यह संतुलन बनाने में मदद मिलेगी.

अब सवाल उठता है कि आपको बजट बनाने की क्‍या जरूरत है? बजट आपको अपने खर्च को तरजीही तौर पर रखने में मदद करता है, आपके दिन-प्रतिदिन के खर्चों का प्रबंधन करता है और निवेश के वैकल्पिक माध्‍यमों की तलाश करता है. आर्थिक लेनदेन का प्रबंधन पर्सनल फाइनेंस का एक महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा है. उधार या लोन काफी महत्‍वपूर्ण हैं. क्रेडिट कार्ड पर लोन लेना अच्‍छा निर्णय नहीं है. यह सलाह दी जाती है कि आप वैसे लोन से बचें जो आपके हाइपोथिकेशन की तरफ जाता है.

क्रेडिट रेटिंग के महत्‍व को समझें
अगर आपकी क्रेडिट रेटिंग अच्‍छी है तो आपको अपेक्षाकृत कम ब्‍याज दर पर कर्ज लेने में मदद मिल सकती है. क्रेडिट स्‍कोर यह प्रदर्शित करता है कि किसी व्‍यक्ति की ऋण लेने की पात्रता कितनी अधिक है. किसी भी व्‍यक्ति की रेटिंग तीन अंकों की संख्‍या में की जाती है. यह संख्‍या जितनी बड़ी होगी ऋण लेने की पात्रता भी उतनी ही अधिक होगी. यह संख्‍या जितनी कम होगी ऋण लेने की पात्रता भी उतनी ही कम होगी. ऐसे कई तरीके हैं जिनके जरिए आप अपनी ऋण लेने की पात्रता बढ़ा सकते हैं. ज्‍यादातर लोग इस पहलू पर गौर नहीं करते हैं. अपनी विश्‍वसनीयता बनाए रखने का सबसे बढि़या तरीका यह है कि आप अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान नियत समय से पहले कर दिया करें. अगर आपकी क्रेडिट रेटिंग खराब है तो संभव है कि बैंक आपके लोन के आवेदन को खारिज कर दे.

बजट बनाकर चलें
प्रत्‍येक व्‍यक्ति को बजट बनाना चाहिए यह सबसे प्रारंभिक चरण है और सबसे अधिक फायदेमंद भी. अब आप पूछेंगे कि बजट क्‍या है? बजट आपके नकद के आने और जाने का प्रबंधन प्रभावी तरीके से करता है. विशेषज्ञों के अनुसार, 50/30/20 का बजटिंग सिस्‍टम सबसे बेहतर रूपरेखा उपलब्‍ध कराता है. इसका मतलब है कि आपकी कमाई का 50 फीसदी आधारभूत जरूरतों जैसे घर के सामान (किराना, खाने-पीने का), परिवहन, किराया और यूटिलिटी बिल्‍स के लिए जाता है. 30 फीसदी हिस्‍सा जीवनशैली से जुड़ी चीजों जैसे शॉपिंग, बाहर खाना खाने आदि में जाता है और शेष 20 फीसदी आपातकालीन परिस्थितियों और रिटायरमेंट करने के लिए बचाया जाता है.

इमरजेंसी फंड की व्‍यवस्‍था करें
अगर आप अपने परिवार के कमाऊ सदस्‍य हैं तो आपको आपातकालीन परिस्थितियों के लिए प्रावधान करते हुए चलना चाहिए. इसका मतलब हुआ कि आपको अपनी शुद्ध कमाई का 10 से 20 फीसदी हिस्‍सा मेडिकल खर्चों और यूटिलिटी बिल्‍स के लिए बचा कर रखना चाहिए. जो लोग आपातकालीन परिस्थितियों के लिए बचत नहीं करते हैं उन्‍हें भविष्‍य में आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है. यह याद रखें कि यह बचत से बिल्‍कुल भिन्‍न है. सामान्‍य तौर पर ऐसा देखा गया है कि जो लोग विपरीत परिस्थिति के लिए पैसे नहीं बचाते उन्‍हें काफी दिक्‍कतें होती हैं.

कर्ज लेने से बचें
अपनी कमाई से ज्‍यादा खर्च करना कुछ लोगों की प्रवृत्ति होती है. यह गलत आदत है. अपनी कमाई से ज्‍यादा खर्च करना आपको परेशानी में डाल सकता है. जहां तक संभव हो खुद को कर्ज से दूर ही रखें. हम में से हर कोई कर्ज-मुक्‍त नहीं हो सकता लेकिन कर्ज लेने पर अंकुश लगाया जाना चाहिए. कभी-कभार किसी परिसंपत्ति के सृजन के लिए कर्ज लेना लाभकारी भी होती है. उदाहरण के तौर पर होम लोन लेकर घर खरीदना. भविष्‍य में परेशानियों से बचने के लिए जितना संभव हो सके, कर्ज लेने से बचें.

क्रेउिट कार्ड से न करें अंधाधुंध खर्च
क्रेडिट कार्ड क्‍या है? क्रेडिट कार्ड बैंकों द्वारा उपलब्‍ध कराई जाने वाली विस्‍तारी बैंकिंग सुविधा है. प्रत्‍येक क्रेडिट कार्ड की एक क्रेडिट लिमिट होती है जिसे किसी व्‍यक्ति की मासिक कमाई और उसके कर्ज लेने की पात्रता के आधार पर तय किया जाता है. क्रेडिट कार्ड का भुगतान ग्रेस पीरियड के भीतर ही कर देना चाहिए क्‍योंकि बाद में भुगतान करने से आपका बोझ बढ़ेगा ही. यह सुनि‍श्चित करें कि आप क्रेडिट कार्ड की क्रेडिट लिमिट के 30 फीसदी से ज्‍यादा का खर्च नहीं कर रहे हैं. अतिरिक्‍त शुल्‍कों से बचने के लिए तय समय से पहले या निर्धारित समय तक बिल का भुगतान कर दें.

क्रेडिट रेटिंग को न करें अनदेखा
ऋण की पात्रता या क्रेडिट स्‍कोर बनाने और उसके प्रबंधन में क्रेडिट कार्ड की भूमिका महत्‍वपूर्ण होती है. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां आपके बैंकों द्वारा दाखिल की गई क्रेडिट रिपोर्ट के बाधार पर आपकी रेटिंग करती हैं. एक अच्‍छी क्रेडिट हिस्‍ट्री आपकी क्रेडिट रेटिंग को बेहतर बना सकती है जिससे आपको अपेक्षाकृत कम ब्‍याज दर पर बैंक से लोन लेने में मदद मिलती है. अगर आप यह सोचते हैं कि आपकी क्रेडिट रेटिंग खराब है तो आप इसे सुधार सकते हैं. क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों जैसे एक्‍सपीरियन, ट्रांसयूनियन और इक्विफैक्‍स से आप अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की मुफ्त प्रति प्राप्‍त कर सकते हैं.

रिटायरमेंट के लिए कर लें तैयारी
आपको रिटायरमेंट के बाद शांतिपूर्ण जीवन जीने के लिए आपको आर्थिक रूप से तैयार रहना चाहिए क्‍योंकि रिटायरमेंट आपकी उम्‍मीदों से कहीं जल्‍दी दस्‍तक दे जाता है. विशेषज्ञों का कहना है कि रिटायरमेंट के बाद आपको अपने मौजूदा वेतन के लगभग 80 फीसदी की जरूरत पड़ेगी. इसके लिए आपको बचत की शुरुआत जल्‍दी करनी चाहिए. आप जितनी जल्‍दी शुरुआत करेंगे उतना ही अधिक लाभ आपको अपने निवेश से होगा. आपको सलाह दी जाती है कि आप भविष्‍य के लिए धन बचाने हेतु ऐसे प्‍लान में निवेश करें जिस पर टैक्‍स बेनिफिट भी मिलता हो.

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